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समाज में व्याप्त दहेज़ रुपी बुराई का शिकार हो रहीं महिलायें

दहेज़ का शिकार हो रही महिलायें

दहेजलोभी पति को अदालत ने कठोर दंड की सजा सुनाई

समाज में व्याप्त दहेज़ रुपी बुराई का शिकार हो रहीं महिलायें

पन्ना – {sarokaar news} समाज में दहेज़ को सामाजिक बुराई के रूप में देखा जाता है तथा आए दिन दहेज़ के लिए महिलाओं पर हिंसा और हत्या के मामले प्रकाश में आते रहते हैं। समाज से दहेज़ की कुप्रथा को मिटाने के लिए अब तक किये गए सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। इसके अलावा कई स्वयंसेवी संस्थाएं समाज से दहेज़ रुपी बुराई को ख़त्म करने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम चलातीं है जो महज कागजों तक सिमटा होने के कारण समाज में लगातार दहेज़ के मामले बढ़ रहे हैं और महिलायें इसका शिकार हो रहीं हैं।

दहेज़ के लिए अपनी पत्नी के मौत के जिम्मेदार पतों को आज अदालत ने कठोर कारावास की सजा सुनकर दण्डित किया है। लोक अभियोजक किशोर श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि दहेज़ के लिए अपनी पत्नी से मारपीट करने दहेज मृत्यु के आरोपी पति महेन्द्र कुमार पटेल को अदालत ने धारा-304 भा0दं0वि0 के अन्तर्गत दस वर्ष, धारा-498 ए भा0दं0वि0 के अन्तर्गत एक वर्ष तथा धारा-4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अन्तर्गत एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं चार हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

दहेज की बेदी पर बलि चढ़ा दी गयी मृतिका का विवाह 02.03.2016 को महेन्द्र पटेल के साथ हुई थी, शादी के फ़ौरन बाद से ही पति द्वारा पत्नी के साथ दहेज़ लाने के लिए मारपीट कर प्रताड़ित करना तथा दहेज़ के रूप में तीन एकड़ जमीन और एक लाख रूपये लाने की मांग करता था। यह बात मृतिका ने अपने घर वालों को बताई थी। इसके बाद दिनांक 25.04.2018 को मृतिका की मृत्यु अस्वाभाविक परिस्थितियों में फाॅसी लगने के कारण उसकी ससुराल निवहरी में हो गई, जिस पर थाना-देवेन्द्रनगर द्वारा मर्ग कायम कर जाॅच की गई। जाॅच में अपराध पाये जाने पर अपराध की कायमी थाना-देवेन्द्रनगर के अपराध क्रमांक-145/2018 में की जाकर सम्पूर्ण विवेचना उपरान्त चालान न्यायालय में पेश किया गया।

मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री पी.के. अग्रवाल ने करते हुए अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायसंगत तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी महेन्द्र कुमार पटेल को दोषी मानते हुये धारा-304 भा0दं0वि0 के अन्तर्गत दस वर्ष, धारा-498 ए भा0दं0वि0 के अन्तर्गत एक वर्ष तथा धारा-4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अन्तर्गत एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं चार हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इस पूरे प्रकरण में लोक अभियोजक किशोर श्रीवास्तव द्वारा सशक्त पैरवी करते हुए सराहनीय भूमिका का निर्वहन किया।

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