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टाइगर रिज़र्व वनकर्मियों की हड़ताल रोक पायेगा अथवा बाघों की सुरक्षा से करेगा समझौता

पार्क प्रबंधन की लापरवाही से हो सकती है हड़ताल

कर्मचारियों की जायज मांगों को प्रबंधन नहीं दे रहा तरजीह

समय से वेतन न मिल पाने के कारण जमीनी अमला परेशान

पार्क प्रबंधन की मनमानी नहीं चलने देंगे : मनीष शर्मा

पन्ना – {sarokaar news} मौजूदा दौर में पन्ना टाइगर रिज़र्व के आला अधिकारियों की लापरवाही तथा उदासीनता के चलते पार्क का जमीनी अमला ख़ासा परेशान है तथा उसे अपनी वेतन के लाले पड़ रहे हैं। पार्क के आला अधिकारियों की उदासीनता का दंश झेलते मैदानी कर्मचारी हताश हो गए हैं और उनमें पार्क प्रबंधन के प्रति रोष पनप रहा है। पन्ना टाइगर रिज़र्व के बनने – बिगड़ने और फिर बनने की पूरी कहानी हमारे सामने है कि कैसे स्वछंद अफसरशाही ने भरे पूरे पार्क को बाघ विहीन कर दिया। इसके बाद पार्क को नया जीवन देने के लिए पन्ना टाइगर रिज़र्व की कमान आर श्रीनिवास मूर्ति के हाथों में दी गयी उन्होंने अपनी लगन और कर्तव्यनिष्ठा का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए अफसरशाही के लिए साफ़ संदेश दिया कि ईमानदारी और लगन से परिस्थितियों को बदला जा सकता है और उन्होंने यह करके दिखाया। आज पन्ना टाइगर रिज़र्व बाघों की गर्जना से गुलजार है इसमें श्री मूर्ति का बहुत बड़ा योगदान है जिसको भुलाया नहीं जा सकता। पन्ना टाइगर रिज़र्व के बाघ और श्री मूर्ति की धरोहर को मौजूदा पार्क प्रबंधन तहस नहस करने पर आमादा है। परिणाम स्वरुप वन कर्मचारी अपनी मांगों के न माने जाने से नाराज हड़ताल पर जाने का मन बना चुके हैं, इसके बाद भी पार्क प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों पर गंभीर नहीं दिख रहा है। सवाल उठता है की अगर वनकर्मी हड़ताल पर जाते हैं तो पार्क के जानवरों की सुरक्षा कौन करेगा।

मध्य प्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ ने पार्क के आला अधिकारियों को दिनांक 8/4/2019 और 29/8/2019 को पत्र लिखकर अपनी लंबित समस्यायों के निराकरण के लिए बाकायदा ज्ञापन सौंपे। वन कर्मी लगातार पार्क प्रबंधन को पत्र लिखकर अपनी परेशानियों को दूर करने की प्रबंधन से गुहार लगा रहे हैं इसके बाद भी पार्क प्रबंधन वनकर्मियों की मांगों पर तवज्जो नहीं दे रहा है। इससे आहत होकर वनकर्मियों ने दिनांक 27/9/2019 को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है आगामी 10 अक्टूबर से पूर्व प्रबंधन द्वारा कार्यालय स्तर पर निराकृत होने वाली मांगों का निराकरण नहीं किया जाता है तो समस्त वनकर्मी 10 अक्टूबर से हड़ताल पर चले जाएंगे जिसकी जवाबदारी पार्क प्रबंधन की होगी।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय का पत्र

मध्य प्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ ने पार्क प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि उनकी छोटी छोटी मांगों को भी प्रबंधन द्वारा पूरा नहीं किया जा रहा है। कार्यालय द्वारा अभी तक हम लोगों की सैलरी नहीं मिली है कार्यालय के बाबू मनमानी कर रहे हैं। हम लोग अपने काम को पूरी निष्ठा से करते हैं तथा पार्क के जानवरों की सुरक्षा में तैनात है लेकिन पार्क प्रबंधन हमारी परेशानियों को समझना नहीं चाहता। हमारी मांगों के संबंध में दिनांक 09/09/2019 को संगठन के प्रांताध्यक्ष बुधराज भागवत द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर अवगत कराया गया था। जिसपर उन्होंने पत्र क्रमांक 457/6553 दिनांक 16/09/2019 के माध्यम से पन्ना टाइगर रिज़र्व क्षेत्र संचालक को कर्मचारियों की समस्यायों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने तथा 7 दिवस में प्रतिवेदन भेजने के लिए निर्देशित किया था।

पन्ना टाइगर रिज़र्व क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया की अकुशल कार्यप्रणाली के कारण एक बार फिर पन्ना टाइगर रिज़र्व सुर्ख़ियों में हैं, अभी हाल में ही क्षेत्र संचालक कार्यालय के बाबू तथा अन्य कर्मचारियों का जुआ खेलते वीडियो ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। यह अलग बात है कि पार्क प्रबंधन इसे जुआ खेलना नहीं मानता है। हो सकता है कि क्षेत्र संचालक कार्यालय के कर्मचारी कार्यालय की कुर्सियों पर बैठकर काम करने में असहज हो रहे हों इसलिए कार्यालय के पीछे जाकर जमीन पर बैठकर जानवरों को बचाने के संबंध में गुप्त मीटिंग कर रहे हों।

दो साल से अपनी जायज मांगों को लेकर पार्क प्रबंधन से पत्राचार कर रहे कर्मचारियों की समस्या का निराकरण न होना बताता है कि पार्क प्रबंधन को पार्क के जानवरो सहित उनकी सुरक्षा में लगे अपने कर्मचारियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। अगर 10 अक्टूबर को वन कर्मचारी संघ हड़ताल पर जाने के लिये विवश होता है तो पार्क प्रबंधन ने जानवरों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये हैं। प्रबंधन स्टाफ की कमी का रोना रोता है तो दूसरी और अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद कर्मचारियों की समस्यायों पर ध्यान नहीं देता है।

मध्य प्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष एम.के. रावत ने कहा है कि क्षेत्र संचालक कार्यालय के बाबुओं की मनमानी के कारण अभी तक हम लोगों को वेतन नहीं मिली है। त्यौहार का मौसम चल रहा है हमारे परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं है। कर्मचारी परेशान हैं उनकी समस्या को पार्क प्रबंधन द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ज्ञापन देने के बाद से आला अधिकारियों द्वारा हम लोगों की चेकिंग कराई जा रही है कि हम लोग अपनी ड्यूटी कर रहे हैं की नहीं। जबकि समस्यायों के बावजूद हम पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, हम चाहते हैं कि प्रबंधन हमारी बात सुने और निराकरण करे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है इसलिए मज़बूरीवश हम हड़ताल के लिए बाध्य हुए हैं।

उप संचालक,पन्ना टाइगर रिज़र्व, ईश्वर जरांडे – कर्मचारियों की सेलरी अभी बनवा रहे हैं ट्रेजरी से भुगतान हो जायेगा। अगर किसी कर्मचारी को समस्या हो रही है तो पहले मुझे संपर्क करना चाहिए अगर निराकरण न हो तो फिर आपलोग (मीडिया) से सम्पर्क करना चाहिए। इंक्रीमेंट लगना था इसलिए सैलरी बनने में देर हुई है।

मनीष शर्मा,जिला कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष एवं संगठन प्रभारी

वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनीष शर्मा ने पार्क प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि पन्ना टाइगर रिज़र्व पन्ना की पहचान है। पार्क का बुरा दौर भी हमने देखा है लेकिन अब हम सब सजग है प्रबंधन द्वारा किसी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। त्योहारों पर समय से कर्मचारियों का वेतन न मिलना ठीक बात नहीं है। वन कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करना पार्क प्रबंधन की जिम्मेदारी है। जमीनी अमला पर बाघ की सुरक्षा की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है इसलिए उनकी मांगों का निराकरण किया जाना अति आवश्यक है। बाघ की सुरक्षा के साथ समझौता करने वाले पार्क प्रबंधन की मनमानी नहीं चलने देंगे । हड़ताल को टालने के लिए हम जल्द ही पार्क प्रबंधन और कर्मचारी संगठन के नेताओं से बात कर हल निकालने का प्रयास करेंगे।

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