पन्ना

52 करोड़ की लागत से निर्मित सिरस्वाहा बांध बना अनुपयोगी

52 करोड़ का बाँध हुआ बेकार

52 करोड़ की लागत से निर्मित सिरस्वाहा बांध बना अनुपयोगी

जल संसाधन विभाग द्वारा बनाये गए बाँध में जमा नहीं हो रहा पानी

विभाग को सता रहा बाँध टूटने का डर, भ्रष्टाचार के चलते टूट चूका है बाँध

बाँध में पानी जमा न होने से किसानों में आक्रोश, आंदोलन की धमकी

पन्ना – {sarokaar news} जिले में गत वर्ष की अपेक्षा इस साल अभी तक कम बारिश हुई है तथा अभी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं हैं। किसानों के साथ साथ आमजन भी पानी की समस्या को लेकर खासे चिंतित नज़र आ रहे हैं इसके बाद भी अबतक प्रशासनिक स्तर पर पानी को रोक कर रखने तथा जलस्रोतों के उचित रखरखाव के लिए ठोस पहल न किया जाना और चिंता बढ़ा रहा है। सबसे ज्यादा चिंतित किसान नज़र आ रहा है, पानी की उपयोगिता किसान समझता है इसलिए उसका चिंतित होना समझ आता है। करोड़ों रूपए खर्च सिंचाई के लिए सरकार द्वारा बांधों का निर्माण किया गया लेकिन व्यापक भ्रष्टाचार के चलते निर्मित बाँध पहली बारिश में ही बह गए और किसानों की उम्मीद पर पानी फिर गया।

पन्ना तहसील अन्तर्गत सिरस्वाहा में 2016 में जल ससांधन विभाग द्वारा 52 करोड की लागत से बाँध बनाया गया था ताकि आसपास के किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध हो सके किन्तु पहली बारिश में ही 52 करोड़ की लागत से निर्मित बाँध फुट गया और जलसंसाधन विभाग की भ्रष्टाचारी को उजागर कर दिया। घटिया निर्माणकार्य और कमीशनखोरी के चलते बाँध का टूटना किसानों की आशाओं पर कुठाराघात साबित हुआ। बाँध फूटने पर लीपापोती का खेल चलता रहा लेकिन बाँध निर्माण में हुआ व्यापक भ्रष्टाचार की कलई खुल चुकी थी।

कम बारिश को देखते हुए ग्रामीण चाहते हैं कि सिरस्वाहा बाँध के गेट बंद किये जाएँ जिससे पानी जमा हो सके लेकिन विभाग को फिर डर सता रहा है कि बाँध में पानी के भराव के चलते कहीं बाँध फिर न टूट जाए इससे बाँध के गेट बंद नहीं किये जा रहे हैं। जल संसाधन अपने भ्रष्टाचार को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहे है तो दूसरी ओर ग्रामीणों की अपनी चिंता है तथा वे दलील दे रहे हैं कि जब बाँध पानी रोकने के लिए बनाया गया है तो गेट क्यों नहीं बंद किये जा रह हैं, अगर गेट बंद नहीं किये गए तो पानी जमाँ नहीं होगा इससे किसानों के सामने मुश्किल कड़ी होगी।

बताते चलें कि जब बाँध के गेट बंद नहीं होंगे तो पानी कैसे जमा हॉग और बाँध क्या उद्देश्य पूरा हो प् रहा है। इन सवालों के जवाब विभाग के पास नहीं है उसे सिर्फ यह चिंता है कि बाँध में पानी जमा करने से अगर बाँध फूट गया तो फिर बदमानी होगी। अपनी बदनामी के डर से किसानों के हितों पर कुठाराघात किया जा रहा है। सिरस्वाहा बाँध अकेला बाँध नहीं है पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा और भी कई बाँध है जो अभी भी अधूरे पड़े हैं। विभाग द्वारा शासन को फर्जी आंकड़े भेजकर सिचाई रकवा में बढ़ोत्तरी दर्शा दी जाती है लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। सिरस्वाहा तथा इटवां क्षेत्र के लोगो ने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा गुहार लगाते हुए मांग की है कि सिरस्वाहा बांध के गेट बन्द किये जाएँ ताकी पानी जमा हो सके अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो मज़बूरन किसान आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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