पन्ना

लोक स्वास्थ्य यांत्रकीय विभाग सुर्ख़ियों में

लोक स्वास्थ्य यांत्रकीय विभाग की लचर कार्यप्रणाली सुर्ख़ियों में
गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं ग्रामवासी
पीएचई विभाग का जल परीक्षण केंद्र बना शोपीस,नदारत रहते हैं कर्मचारी
विभाग के आला अधिकारी चेहेतों को मानवता के आधार पर देते हैं छुट्टी
पन्ना- राजनीतिक शून्यता की मार झेल रहा जिला पन्ना में आने वाले अधिकतर अधिकारी पन्ना को आसान चारागाह के रूप में देखते हैं तथा पूरे ठाट बात से रहते हुए अपने सामर्थानुसार खूब कमाई करते हैं। जिसके चलते सरकारी योजनाओं का लाभ जिले वासियों को नहीं मिल पाता है। बताते चलें कि वर्तमान में लोक स्वास्थ्य यांत्रकीय विभाग में अफसरशाही का बोलबाल है ग्रामीण इलाकों में नलजल योजना के क्रियान्वयन में घोर लापरवाही बरती जा रही है इससे लोगों को साफ़ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा हैI नलजल योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी उपलब्ध न होने के कारण आज पूरे जिले में वर्षाजनित बीमारियां फैल रही हैं इसका जिम्मेदार कौन है। जिले की अधिकांश नल जल योजना ठप्प पड़ी हुई हैं लोग दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। दूषित पानी पीने से लोग मर रहे हैं इसके बाद भी किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है अफसरों के पास अपने तर्क हैं। शासन लाखों करोड़ों रूपए खर्च करके लोगों को सुविधा उपलब्ध कराती है और अफसरशाही शासन की योजनोँ को पलीता लगा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रकीय विभाग द्वारा ग्रामीण इलाकों में लगाए गए हैंडपम्पों को रसूखदारों ने अपने कब्जे में ले रखा है ग्रामीणों की शिकायत पर भी विभाग द्वारा कार्यवाई न करना विभाग की उदासीनता का दर्शाता है। जिला मुख्यालय से लगी हुई ग्राम पंचायत जानवर में ऐसे ही एक सार्वजानिक हैंडपंप पर कब्ज़ा कर लिया गया है ग्रामीणों की शिकायत पर भी विभाग ने आजतक कोई कार्यवाई नहीं है।जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर यह हाल है तो अंदाजा लगाया ज सकता है कि दूरदराज के क्षेत्रों में की स्तिथि होगी।
शोपीस बना जल परिक्षण केंद्र- लोक स्वास्थ्य यांत्रकीय विभाग में खुला जल परिक्षण केंद्र महज शोपीस बनके रह गया है। परिक्षण केंद्र के कर्मचारी कब आते हैं कब जाते हैं कोई निश्चय नहीं है। पीएचई विभाग में बना जल परीक्षण केंद्र सिर्फ कागजों पर चल रहा है जल परीक्षण केंद्र में यदि जाकर देखा जाए तो परखनलियों मे धूल जम गई है ओर अन्य उपकरण जंग खा रहे हैं। जल परिक्षण केंद्र में दो कर्मचारी पदस्थ हैं जिसमे से एक कर्मचारी पर साहब की भरपूर कृपा बनी हुई है। जिससे उक्त कर्मचारी अधिकतर ड्यूटी के समय नदारत रहता है। कृपापात्र कर्मचारी के बारे में जब साहब से पूछा तो उन्होंने बताया की मानवीय आधार पर उसको छुट्टी दी जाती है। काबिलेगौर है कि साहब की मानवीयता अपने चहेते कर्मचारी तक ही सीमित है वर्ना दूषित पानी पीकर बीमार हो रहे ग्रामीणों के लिए साहब साफ पानी तथा पानी की जाँच आदि करवाने के लिए जरूर प्रयास करते।

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