उत्तर प्रदेश

संजीव भट्ट के समर्थन में लखनऊ के प्रगतिशील जन संगठन

संजीव भट्ट के समर्थन में सामाजिक संगठन

संजीव भट्ट के समर्थन में लखनऊ के प्रगतिशील जन संगठन

लखनऊ – {sarokaar news} लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में लोकतांत्रिक आवाज़ों पर बढ़ते हमलों और पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ लखनऊ के प्रगतिशील जन संगठनो ने सेमिनार का आयोजन किया। एनएपीएम की अरुंधती धुरू ने बताया की 20 जून, 2019 को भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संजीव भट्ट, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई से एम.टेक. की उपाधि से विभूषित हैं, एक 28 वर्ष पुराने मामले में आजीवन कारावास की सजा हो गई। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने 1990 में प्रभुदास वैशनानी, जो 150 लोगों के साथ एक साम्प्रदायिक दंगे में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया जिससे 18 दिनों के बाद उसकी मौत हो गई।

यूपी पुलिस के पूर्व आईजी एसआर दारापुरी ने बताया की प्रभुदास वैशनानी की पुलिस कस्टडी में मौत की घटना की जांच में यह सत्य न पाए जाने के कारण पहले गुजरात सरकार ने इस मामले में संजीव भट्ट व अन्य पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी। किंतु 14 अप्रैल 2011 में सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर संजीव भट्ट ने नरेन्द्र मोदी पर यह आरोप लगाया के 27 फरवरी 2002 को गोधरा कांड के बाद मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने घर पर पुलिस अधिकारियों की एक बैठक में उन्हें ’हिन्दू प्रतिक्रिया’ के रास्ते में बाधा न बनने की सलाह दी और हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ अपना गुस्सा निकालने की छूट देने को कहा। इसके बाद तीन दिनों तक दंगा चला जिसमें एक हजार से ऊपर लोग मारे गए। मरने वालों में तीन-चैथाई मुस्लिम थे। उसी दिन गुजरात सरकार ने संजीव भट्ट व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ 1990 के मामले में आरोप खारिज करने वाला अपना पत्र वापस ले लिया और 18 सितम्बर, 2011 को आरोप पत्र दाखिल किया। अब संजीव भट्ट व छह अन्य को आजीवन कारावास की सजा हो गई है। वक्ताओं ने कहा की जाहिर है कि संजीव भट्ट के खिलाफ कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करने के कारण ही हुई है। जो बात उन्होंने कही है वह कई और पुलिस अफसर व राजनेता भी कह चुके है। यह बात 2002 में गुजरात के गृह मंत्री रहे हरेन पण्ड्या भी कह चुके हैं। बाद में उनकी हत्या को गई। मैगसेसे पुरस्कार विजेता प्रो. संदीप पाण्डेय ने कहा की संजीव भट्ट को सच कहने की सजा दी गई है। यदि संजीव भट्ट के कथन में सत्यता नहीं है तो नरेन्द्र मोदी को घबराने की क्या जरूरत है? यदि नरेन्द्र मोदी 2002 के दंगों में पूर्णतया निर्दोष हैं तो यह बात न्यायालय से तय होनी चाहिए।

रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा की संजीव भट्ट के खिलाफ एक झूठे मामले में सजा दिलवा कर नरेन्द्र मोदी की सरकार यह संदेश देना चाहती है कि जो भी इस सरकार का विरोध करेगा उसकी आवाज को कुचला जाएगा। इस लोकतंत्र विरोधी सरकार में नागरिकों के मौलिक अधिकार भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा की जो भी आवाज़ें सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध करेंगी उनको इसी तरह जेलों में डाल दिया जाएगा।

लखनऊ के प्रगतिशील जन संगठनों वा नागरिकों ने संजीव भट्ट की रिहाई के लिए चलाए जा रहे अभियान को अपना समर्थन दिया।

कार्यक्रम में पूर्व आईजी एसआर दारापुरी, रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब, प्रो. संदीप पाण्डेय, एनएपीएम की अरुंधती धुरु, इनायतुल्लाह, प्रो. जमाल नुसरत, पीसी कुरील, सृजनयोगी आदियोग, नीति सक्सेना, अजीजुल हसन, शाहिरा नईम, डा. सुमन गुप्ता, ओ पी सिन्हा, एहसानुल हक मालिक,रॉबिन रॉबिन, विनोद कुमार यादव, इमरान अंसारी, खालिद चौधरी, गंगेश, कमर सीतापुरी, एडवोकेट वीरेंद्र त्रिपाठी, आर एस मुर्तजा, मोहम्मद अब्दुल्ला खान, गीता सिंह,शाहरूख अहमद, शम्सतबरेज, मिर्ज़ा हुमायूं, आशीष, मोहम्मद क़ुतुब आलम, शकील कुरैशी, घुफ्रान सिद्दीक़ी, डा. एमडी खान, शबरोज मोहम्मदी, आनंद वर्धन, अमरदीप सिंह, सतीश वर्मा, आरडी पटेल, एडवोकेट हादी खान, एडवोकेट रफीउद्दीन खान, सुमिता, ममता सिंह, रुबीना मिर्ज़ा, जैनब सिद्दीक़ी, घनश्याम कुमार,हफीज किदवई, ज्योति राय, संदीप वर्मा, अब्दुल सालेह, रविन्द्र कुमार,सचिन यादव, लालू कनौजिया, निहाल चौधरी, अहमदुल्लाह, वीरेंद्र कुमार गुप्ता, इन्द्र प्रकाश बौद्घ, मोहम्मद लुकमान, मोहम्मद ओवैस, मोहम्मद हमजा बेग, मसूद रज़ा, सलमान अली, अमन यादव मुन्ना, कनिका सचान, दीक्षा दिवेदी मौजूद रहे।

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