पन्ना

नपा अपनी शर्तों पर शहरियों को पानी देती है

बिजली नहीं तो पानी नहीं

नपा अपनी शर्तों पर शहरियों को पानी देती है

बिजली बाधित होने पर शहरियों को नहीं मिलेगा पानी

आमजन से लाखों वसूलने वाली नपा के पास नहीं हैं बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था

पन्ना – {sarokaar news} बिजली की आंख मिचौली आमजन पर भारी पड़ रही है,बिजली हमारे जीवन में इतना रच बस गयी है कि बिना बिजली जीवन जीने की कल्पना नहीं की जा सकती है। बिजली पर आत्मनिर्भरता के कारण कुछ देर के लिए ही बिजली उपलब्ध न हो तो हमारे कई महत्वपूर्ण दैनिक कार्य प्रभावित हो जाते हैं तथा मानव जीवन अस्त व्यस्त होने लगता है। उदाहरण के तौर पर कल रात बिजली की आंख मिचौली के चलते सुबह शहरियों के सामने पानी की किल्लत सामने खड़ी थी। दरअसल रात को बार-बार बिजली आ जा रही थी इससे तालाबों का पानी मुख्य टैंक तक नहीं पहुंचा तथा शहर के कई इलाकों में नल द्वारा जल की सप्लाई बाधित हो गई। सुबह सुबह जब नलों में पानी नहीं आया तो इसका असर सैकड़ों शहरियों के जीवन पर पड़ा और उनकी दैनिक दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई। कइयों को नहाने के लाले पड़ गए तो कइयों के पास हाथ मुँह धोने के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं था। सुबह सबेरे काम छोड़कर 10 बजे तक पानी के लिए कुओं और हैंडपंप तथा बोरिंग से डब्बा लेकर जरुरत भर पानी लाते देखे गये।

आइये बात करते हैं सरकारी सुविधाओं और सेवा प्रदाता विभाग की कार्यशैली की कि वह अपने नागरिकों को सुविधा प्रदाय करने के लिए कितनी चुस्त दुरुस्त है। बिजली की आँख मिचौली से पनपी इस समस्या पर बिजली विभाग दलील दे सकता है कि बिजली सप्लाई में यह समस्या थी इसलिए बिजली बाधित रही फिर आप क्या करेंगे, दरअसल आप कुछ नहीं कर सकते क्योंकि आप सिर्फ और सिर्फ एक आम नागरिक हैं। आपको पैसे देकर मिल रही सुविधाओं को प्रदान करने वाली एजेंसियों की आपके प्रति कोई जवाबदारी नहीं है क्योंकि एजेंसियां सरकार संचालित करती है।

यही हाल नगर पालिका का है, पानी सप्लाई न होने के कारण सैकड़ों शहरियों को परेशान होना पड़ा किन्तु उनके पास भी आपको बताने के लिए बिजली विभाग पर दोष मढ़ने का पूरा जवाब तैयार है। पानी सप्लाई न होने के सवाल पर नगर पालिका के जिम्मेदार बड़ी मासूमियत से जवाब देते हैं कि रात को बार बार बिजली जाने आने के कारण पंप नहीं चल पाया इसलिए हमारा क्या दोष।

नगर पालिका शहरियों से पानी उपलब्ध कराने के लिए बाकायदा हर माह पैसे लेती है,एक अनुमान के अनुसार शहर में तकरीबन 9 हजार से अधिक नल कनेक्शन हैं इन कनेक्शनधारियों से नगर पालिका द्वारा हर माह 9 लाख रुपये और साल में एक करोड़ से अधिक रुपये वसूलने वाली नगरपालिका मूलभूत तथा सीधे आमजन की जीवन से जुडी पानी की सप्लाई के लिए वैकल्पिक बिजली की व्यवस्था क्यों नहीं करती। पानी की सप्लाई के लिए भारी भरकम राशि वसूलने वाली नगर पालिका क्या इस शर्त पर आमजन को पानी देती है कि अगर बिजली बाधित होगी तो पानी की सप्लाई रोक दी जाएगी। जिम्मेदारों का यह कहना कि बिजली बाधित होने के कारण हमारा दोष नहीं है। वाकई इसमें आपका कोई दोष नहीं है, दोष तो इस सिस्टम में है और सिस्टम को सरकार नियंत्रित करती है और सरकार तो आमजन के लिए लाखों करोड़ों खर्च कर सुविधाएं मुहैया कराती है, फिर दोषी कौन है?

आप कह सकते हैं कि यह सिस्टम की कमी है, तो आपकी जानकारी के लिए एक बार फिर बता रहा हूँ कि सिस्टम को सरकार संचालित करती है और सरकार अपने नागरिकों के लिये लाखों करोड़ों रुपये खर्च करती है। “इतिश्री”

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