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डीएफओ के साथ वनरक्षक की अभद्रता

जंगल में अवैध उत्खनन से होने वाली आय बनी कारण

डीएफओ के साथ वनरक्षक की अभद्रता

अवैध हीरा खदान से निकले बेशकीमती हीरे की हिस्सेदारी घटना का कारण : सूत्र

वन क्षेत्र में संचालित अवैध हीरा खदान बनी कमाई का जरिया

डीएफओ और मातहत अधिकारियों/कर्मचारियों के बीच घोर सामंजस्य की कमी

सामंजस्य के अभाव का खामियाजा जंगल भुगत रहे

पन्ना – {sarokaar news} जिले के उत्तर वन मंडल,दक्षिण वन मंडल और पन्ना टाइगर रिजर्व के आला अधिकारी आए दिन अपनी कार्यशैली के चलते सुर्खियों में रहते हैं। पन्ना टाईगर रिजर्व का अवैध सागौन कटाई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि उत्तर वन मंडल पन्ना में पदस्थ डीएफओ नरेश यादव के साथ वन रक्षक की कथित गाली गलौज और जान से मारने का मामला सामने आ गया है। अपनी ख़ास कार्यप्रणाली को लेकर बेहद कम समय में सुर्खियां बटोरने वाले नरेश यादव ने पन्ना के जंगलों और यहां से निकलने वाली कीमती खनिज के दोहन के लिए अपने खासमखास लोगों से सांठगांठ कर लूटने का खेल शुरू किया जिसकी परिणीति में उनके ही मातहत एक अदना से कर्मचारी ने उनके साथ अभद्रता करते हुये मारने का कथित प्रयास किया।

उत्तर वन मंडल डीएफओ नरेश यादव

बताते चलें कि पन्ना जिला में लम्बे समय से राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव रहा है जिसका फायदा यहां के आला अधिकारी खूब उठाते हैं। रीढ़ विहीन जनप्रतिनिधि और व्यवसायी पत्रकारिता भ्रष्टाचार करने के लिए उम्दा किस्म की उर्वरता का माहौल पैदा करता है। इस माहौल में निरंकुश आला अधिकारी प्राकृतिक संसाधनों से धनी पन्ना जिला को लूटने के प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं। उत्तर वन मंडल,दक्षिण वन मंडल और पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षित क्षेत्र में अवैध हीरा खदान पत्थर खदानों सहित सागौन की अवैध कटाई आम बात है। उक्त तीनों विभागों में दशकों से जमे अधिकारी कर्मचारी होने वाले भ्रष्टाचार में महत्वपूर्ण किरदार निभाते हैं। उत्तर वन मंडल की हाल की घटना को देखा जाए तो विभाग के लोग सामने आये बिना कह रहे हैं कि वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन से होने वाली आय के बटवारे को लेकर यह घटना हुई है। ज्ञात हो कि वन क्षेत्र में चलने वाली अवैध हीरा खदानों से मिलने वाले बेशकीमती हीरा को लेकर नीचे से लेकर ऊपर तक सबका हिस्सा निर्धारित है। बताया तो यहाँ तक गया है कि विगत दिनों उत्तर वन मंडल क्षेत्र में चल रहीं अवैध खदानों से बेशकीमती 27 कैरेट का हीरा उत्तर वन मंडल के आला अधिकारी के ख़ास व्यक्ति को मिला था। हीरा मिलने पर संबंधित बीट में तैनात वन रक्षक ने अपना हिस्सा माँगा तो इसकी शिकायत उक्त व्यक्ति ने आला अधिकारी से कर दी। अदना से कर्मचरी द्वारा हिस्सा मांगे जाने से नाराज आला अधिकारी ने वन रक्षक को निलंबित कर दिया।

यहाँ से शुरू होता है लड़ाई झगड़े का खेल, ज्ञात हो कि उक्त बीट में तक़रीबन महीने भर पूर्व एक और दबंग व्यक्ति अवैध रूप से हीरा उत्खनन करना चाहता था किन्तु उसे खोदने की अनुमति नहीं दी गयी क्योंकि आला अधिकारी उक्त जमीन पर अपने खासमखास लोगों के लिए आरक्षित कर अवैध खुदाई करवा कर अनुग्रहित करने में लगे थे। जिसपर नाराज दबंग ने वन रक्षक की धुनाई कर दी ऐसी ख़बरें सुनने को मिलीं थीं। अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा वनरक्षक जिसने अपने आला अधिकारी के फरमान पर दबंग से उलझकर मार भी खाई उसी अधिकारी ने अपने खासमखास के लिए उसे निलंबित कर दिया। निलंबन की मार और अपना हिस्सा जाता देख वन रक्षक का धैर्य जवाब दे गया और उसमे अपने आला अधिकारी के साथ कथित झगड़े का मामला सामने आया है।

इस घटना से विभाग के अंदर खाने में क्या चल रहा है और विभाग कैसे काम करता है यह उजागर होने के साथ साथ कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्या कारण था कि एक वन रक्षक अपने अला अधिकारी के साथ अपशब्द और मारने का प्रयास करता है लेकिन वहां विभाग के दो दर्जन से अधिक कर्मचारी और कई अधिकारी अपने आला अधिकारी को बचाने और बीच बचाव करने के लिए कोई पहल नहीं करते। क्या उत्तर वन मण्डल के डीएफओ नरेश यादव अपने मातहत कर्मचारियों के साथ सामंजस्य बनाने में असफल रहे हैं अथवा अपने मातहतों को नज़रअंदाज करते हुए अपनी मनमानी करते हैं। जब विभाग के आला अधिकारी के साथ विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी साथ खड़े नहीं हो रहे हैं तो फिर कैसे जंगल में सामंजस्य बनाकर अवैध कटाई और अवैध उत्खनन के खिलाफ एकजुटता के साथ खड़े हो पाते होंगे।

डीएफओ नरेश यादव ने अपने साथ हुई इस घटना की सूचना पुलिस को देकर अपनी जान माल की हिफाजत की गुहार लगाईं है तथा पुलिस ने मामला कायम क जांच शुरू कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर जब डीएफओ नरेश यादव का पक्ष जानने की लगातार कोशिश करते हुए कई बार उनके मोबाइल पर कॉल किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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